Principal's Desk

प्राचार्य वक्तव्य

रवाईं क्षेत्र में अवस्थित राजकीय महाविद्यालय पुरोला-उत्तरकाशी 25 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर रहा है। महाविद्यालय की संरक्षिका होने के नाते मेरे लिए यह बहुत ही हर्ष का विषय है। वर्ष 1993 ई0 में स्थापित राजकीय महाविद्यालय पुरोला-उत्तरकाशी रवाईं, जौनसार, बंगाण तथा पर्वत क्षेत्र के विद्यार्थियों की उच्चशिक्षा की पिपासा को पूर्ण करने का भरसक प्रयत्न कर रहा है। इस महाविद्यालय की स्थापना विज्ञान संकाय के पाँच विषयों-भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जन्तु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान तथा गणित के साथ हुई।

वर्ष 2013 में विज्ञान संकाय के साथ-साथ कला संकाय के सात विषयों-हिन्दी, राजनीति विज्ञान, अंग्रेजी, इतिहास, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र तथा शिक्षाशास्त्र की कक्षाओं का संचालन प्रारम्भ हुआ। इस महाविद्यालय में नौगाँव, धारी-कफनौल, गोडर, आराकोट, लिवाड़ी-फिताड़ी, जखोल, सांकरी, मोरी, मसरी, खन्यासनी आदि सीमांत, दूरस्थ एवं पिछड़े क्षेत्रों से छात्र-छात्राएँ अध्ययन करने आते हैं। इस आधार पर दुर्गम क्षेत्र में अवस्थित इस महाविद्यालय की उपयोगिता स्वतः सिद्ध है। महाविद्यालय न केवल छात्र-छात्राओं की उच्च शिक्षा के ज्ञान की आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है अपितु उनके व्यक्तित्व के विकास, सामाजिक एवं मानवीय मूल्यों की गहरी समझ को भी विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस हेतु संस्थान के बुनियादी ढाँचे को उत्तरोत्तर सुदृढ़ कर मानवीय संसाधनों का गहन समावेश भी किया जा रहा है। संस्थान इस बात के लिए भी प्रयासरत् है कि नवीनतम कौशल विकसित करने वाले कौशल वृद्धि और कैरियर उन्मुख पाठ्यक्रम, जैसे-बी-एड0, बी0बी0ए0, योगा आदि को प्रारम्भ करके शिक्षा के प्रति एक प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाया जाए। जिससे छात्र-छात्राएँ न केवल शिक्षा ग्रहण कर सकें अपितु समकालीन युग में तादात्म्य स्थापित करते हुए प्रगति कर सकें। महाविद्यालय में एन0एस0एस0, रोवर्स रेंजर्स आदि इकाइयाँ पूर्ण उत्साह के साथ संपादित की जा रही है।

रवाईं क्षेत्र अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए भी प्रसिद्ध है। इसके अनुकूल छात्र-छात्राओं में अपनी सांस्कृतिक पहचान को अभिव्यक्त करने के लिए ललक दिखाई देती है। महाविद्यालय इस हेतु छात्र-छात्राओं को प्रत्येक सत्र में आयोजित होने वाली सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने तथा उनके सांस्कृतिक बोध निखारने के लिए उन्हें समय-समय पर मंच प्रदान करता है। छात्र-छात्राओं ने सत्र दर सत्र आयोजित होने होने सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करते हुए संस्थान को गौरावान्वित किया है।

Principal - Dr. Gauri Sevak


संस्थान के छात्र-छात्राओं सहित प्राध्यापक वर्ग अपनी उत्तरदायित्वों का निर्वहन पूर्ण सूझबूझ के साथ कर रहे हैं। अध्ययन-अध्यापन की नई-नई तकनीकों को अपनाने के लिए संगोष्ठी, कार्यशालाओं, पुनश्चर्या पाठ्यक्रमों, अभिविन्यास कार्यक्रमों में अपनी सक्रिय भागीदारी करते रहते हैं। जिसका सीधा लाभ उनकी शिक्षण एवं अध्यापन शैली में अभिवृद्धि के रूप में देखा जा सकता है। साथ ही बदलते परिवेश के अंतर्गत समसामयिक दबावों में बेहतर काम करने की ऊर्जा भी प्रदान करता है।

मैं संस्थान के पुराने और नए छात्र-छात्राओं को अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ देती हूँ, जो पूर्ण मनोयोगपूर्वक विद्यार्जन कर समाज में अपनी प्रतिष्ठा स्थापित कर रहे हैं। साथ ही सभी संकाय के सदस्यों को भी हृदय से साधुवाद देती हूँ, जो शिक्षण के महान और चुनौतीपूर्ण कार्य के साथ संस्थान के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं।

Dr. Gauri Sevak